श्रीकृष्ण की छठी: नवजीवन का उत्सव
श्रीकृष्ण की छठी: नवजीवन का उत्सव **भारतीय संस्कृति में जन्म के बाद का हर दिन खास होता है, लेकिन ‘छठी’ का दिन अत्यंत शुभ और पावन माना गया है। श्रीकृष्ण की छठी का उत्सव एक अनुपम परंपरा है, जो न केवल पूजा-अर्चना का पर्व है, बल्कि परिवार और समाज को भी जोड़ता है।** *** #### छठी: क्या है इसका महत्व? श्रीकृष्ण की छठी उनके जन्म के छठे दिन मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन ‘छठी माता’ शिशु के भविष्य का लेखा-जोखा लिखती हैं। छठी का शुभ दिन बालक के उज्ज्वल भविष्य, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना हेतु समर्पित होता है। *** #### छठी की परंपराएँ - घर में विशेष सफाई और सजावट की जाती है। - श्रीकृष्ण या शिशु को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और घर में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। - चावल के आटे से छठी माता की आकृतियाँ बनाई जाती हैं। - महिलाएँ पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और घर में उत्सव का माहौल होता है। - कुएं या तालाब के जल से शिशु को स्नान कराया जाता है, जिससे उसका शारीरिक-मानसिक विकास शुभ हो। ...